लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला गुरुवार को एक बार फिर सदन की कार्यवाही में शामिल हुए। एक दिन पहले बुधवार को उनके खिलाफ लाया गया विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से खारिज हो गया था। प्रस्ताव का नोटिस दिए जाने के बाद से ओम बिरला लोकसभा की कार्यवाही में शामिल नहीं हो रहे थे। प्रस्ताव गिरने के बाद उन्होंने गुरुवार को सदन में वापसी की और सदस्यों को संबोधित करते हुए अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को तथ्यों के साथ खारिज किया।
‘संसदीय इतिहास में तीसरी बार अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा’
सदन को संबोधित करते हुए ओम बिरला ने कहा कि स्वतंत्र भारत के संसदीय इतिहास में यह तीसरी बार था जब लोकसभा में अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने हमेशा यह सुनिश्चित करने की कोशिश की कि सदन का हर सदस्य नियमों और निर्धारित प्रक्रियाओं के भीतर रहते हुए अपने विचार रख सके।
‘लोकसभा 140 करोड़ भारतीयों की इच्छाओं का प्रतिनिधित्व करती है’
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि उन्हें हटाने के प्रस्ताव पर सदन में लगभग 12 घंटे तक चर्चा हुई, जिसमें विपक्ष ने निष्पक्षता को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त कीं और यह भी कहा कि सदन में उनकी आवाज दबाई गई। इस पर ओम बिरला ने कहा कि लोकसभा देश के 140 करोड़ लोगों की आकांक्षाओं और इच्छाओं का प्रतिनिधित्व करती है। उन्होंने हमेशा यह प्रयास किया कि हर सदस्य को नियमों के दायरे में अपनी बात रखने का अवसर मिले। उन्होंने यह भी कहा कि जो सदस्य सदन की कार्यवाही में बोलने से झिझकते हैं, उन्हें भी भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया गया।
‘सदन के विश्वास के लिए आभारी हूं’
ओम बिरला ने कहा कि उनका प्रयास हमेशा रहा है कि सदन की कार्यवाही निष्पक्षता और नियमों के अनुरूप संचालित हो। उन्होंने बताया कि जिस दिन विपक्ष ने उन्हें अध्यक्ष पद से हटाने के लिए प्रस्ताव का नोटिस दिया, उसी दिन से वे सदन की कार्यवाही से दूर रहे। उन्होंने उन सभी सदस्यों का आभार जताया जिन्होंने बहस के दौरान उनका समर्थन किया या आलोचनात्मक सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष की कुर्सी किसी एक व्यक्ति की नहीं बल्कि पूरे सदन की प्रतिष्ठा का प्रतीक होती है और सदन द्वारा व्यक्त किए गए विश्वास के लिए वे आभारी हैं।
‘सदन में नियमों से ऊपर कोई नहीं’
लोकसभा अध्यक्ष ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने से रोकने के आरोपों पर भी जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सदन में हर सदस्य को बोलने का अधिकार है, लेकिन यह अधिकार नियमों और प्रक्रियाओं के तहत ही लागू होता है। उन्होंने कहा कि लोकसभा में कोई भी व्यक्ति नियमों से ऊपर नहीं है और ये नियम सभी पर समान रूप से लागू होते हैं।
ओम बिरला ने कहा कि प्रधानमंत्री और मंत्रियों को भी सदन में बयान देने के लिए नियमों के तहत नोटिस देना पड़ता है। कुछ सदस्यों का मानना था कि नेता प्रतिपक्ष को किसी भी विषय पर कभी भी बोलने का विशेषाधिकार है, लेकिन ऐसा कोई विशेषाधिकार किसी को प्राप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि सदन में बोलने का अधिकार सभी को है, लेकिन वह सदन द्वारा बनाए गए नियमों के दायरे में ही होता है।
